倉金篤史『PiNKS』

 

 

PiNKS

 

作者:倉金篤史

発行:徳間書店 2013年

レーベル:RYU COMICS

 

 

 

5年1組の授業でかく絵の題は、「お父さんとお母さん」。

「赤城更紗(さらさ)」がおかしなものを描写。

 

 

 

 

それは人間の性行為。

お父さんとお母さんがセックスして、なにがわるいのかしら?

 

 

 

 

おませな更紗の父は画廊経営者。

アフロディーテがアドニスかだれかとまじわる絵をみせられ、性にめざめる。

だいすきなパパとママがはげしく、やさしく愛しあい、

その果実としてわたしが生れたなんて、信じられないほどうつくしい奇跡!

 

 

 

 

だからセックスについてもつとしりたい。

国家機密よりひそかな謎を。

 

 

 

 

クラスのムッツリスケベ男子「弥彦」をしたがえ、エロス探求の冒険へ。

エロ本の自動販売機をみつけたり。

 

 

オールドスクールな本をえらんだものだ

 

 

街のちいさな本屋で直接買うのが一番、とゆう結論に達する。

ただし表紙をさしかえて。

裏の広告でたくらみはバレるが。

「コンドーム」がなにか、ふたりともしらなかつた。

 

 

 

 

お姉さんの刺しつらぬく様な視線。

万引きみたいな犯罪ぢやないのに、なぜそんなつめたい目でみるの?

 

 

 

 

ワケありの書店員は、更紗と弥彦のクラス担任のしりあい。

なぜコドモにエロ本をみせたらダメなのか。

先生の立場からしたら、アタリマエのはなし。

成長過程において、そしてジェンダー論的に微妙な問題で、

責任あるオトナとしては、かくしておくのが賢明。

 

 

 

 

そもそも更紗が性に執着するのは、両親の不仲が原因。

セックスは神聖な行為のはずなのに、そこにホンモノの愛がないとしたら。

ケモノの交尾となにがちがうの?

 

 

 

 

雨のガード下で、パンツをぬぐ更紗。

セックスはみにくい、人間はみにくい、だからわたしもみにくい。

みにくいわたしのすべてをみて。

すべて否定して。

そしてわたしをオトナにして。

 

 

 

 

ムッツリ少年は、散々なぐられながらも、早熟少女に同意しない。

だつてキレイだから。

ボクはいやらしい人間なんだろうけど、この気持ちは否定したくない。

 

 

 

 

聖と俗、コドモとオトナ、女と男、罪と罰……対立する諸概念が、

額縁のなかでよりそつたり交叉したり乱反射しつつ、唯美主義的結論をくだす。

これが初単行本のアンファン・テリブル、倉金篤史の視線がつきささる。




PiNKS (リュウコミックス)PiNKS (リュウコミックス)
(2013/10/12)
倉金篤史

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苑田 謙

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