アキヤマ香『ぼくらの17-ON!』

 

 

ぼくらの17-ON!

 

作者:アキヤマ香

協力:佐藤文香

掲載誌:『JOURすてきな主婦たち』(双葉社)2012年-

単行本:ジュールコミックス

 

 

 

 

遊具の穴抜ければ世界しかも春

 

俳句愛好会(のち部へ昇格)にはいりたての高校二年生「久保田くん」が、

ちかくの公園へプチ吟行したときよんだ句。

 

 

 

 

落し物を縁にしりあつた、お嬢さま高の俳句部の「錦織彩ちやん」と仲よくなろうと、

未知なる世界へとびこんだ。

 

 

 

 

一見、つかれたリーマン風(?)な部長の「山本くん」は、

街をあるけばそのメガネが季語をサーチする文学青年。

 

 

 

 

部長は、久保田くんのドシロウト俳句に嫉妬をおぼえた。

ありふれた風景が、新生児の視界の様に、みづみづしくたちあがるさまに。

 

俳人の佐藤文香が協力しており、内容は折り紙つき。

 

 

 

 

めざすは「俳句甲子園」!

5対5でむきあい、句の発表とディベイトで勝敗きそう。

実在する大会で、2005年に映画(『恋は五・七・五!』)の題材となつた。

 

おしとやかな彩ちやんも、試合はじまると眼光するどく。

女子校と共学校の真剣勝負。

 

 

 

 

ボクのお気にいりは、「森先輩」のさわやかな句。

陸上部とかけもちで活動してきた。

 

 

 

 

ラストスパートの果ての青空わたしのもの

 

字あまりがスピード感を演出する秀作。

高校生にしかよめない世界があるのはたしか。

 

 

強豪校はそろいのTシャツで出場

 

 

ボクは藝術家でないが、その周辺領域にたづさわつている自覚があり、

言語藝術が、「青春」の甘酸つぱさと無縁な、はてない時間の浪費と、

憂鬱なコスト計算からなる、「戦場」に類するなにかを意味するのをしる。

 

 

 

 

彩ちやんは、山本くんの兄とつきあつていた。

いけすかない感じの年上の男。

この痛みは青春。

おもえば俳句の17音つて、「永遠の17歳」的なひびきが。

 

 

 

 

うつろう季節のなか、この一瞬を記録し、きもちを共有。

俳句はプリクラとにている。




ぼくらの17-ON! (1) (ジュールコミックス)ぼくらの17-ON! (1) (ジュールコミックス)
(2013/06/17)
アキヤマ香

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苑田 謙

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