えのきづ『桜乃さん迷走中!』

 

 

桜乃さん迷走中!

 

作者:えのきづ

掲載誌:『まんがタイムジャンボ』(芳文社)2011年~

単行本:まんがタイムコミックス

 

 

 

 

ブログ左上の「最近の記事」を御覧いただくとわかる様に、

ここ数日更新に熱をいれているが、今日はそれ以上に太陽熱がすさまじく、

『2050年の世界 英エコノミスト誌は予測する』(文藝春秋)について、

融解する脳細胞では書評をものせなかつた。

水をガブ飲みし、命をつなぐので精一杯。

漫画すら読む気がしない。

『桜乃さん迷走中!』をのぞいて。

 

 

 

 

桜乃さんはOL一年生……だつたが、会社が倒産。

社宅からも叩き出される。

親の反対を押し切り上京した手前、実家にもかえれない。

1500円の寝袋を買い、公園でホームレス生活をはじめた。

 

 

 

 

雨にふられ凍死しかける。

そこへ通りかかつたのが、女流作家の大江さん。

桜乃さんがダメすぎて、なんだか昔話のキャラみたいで、

たすければ恩返しとかありそうと思い、家に連れてかえる。

 

 

 

 

「でも住む家ないですし…困ったなー…困った…」

チラッ、チラッ。

裏表紙に載つている冒頭の四コマが印象的で、

「サバイバルもの」を期待して買つたら、実は「居候もの」。

見ず知らずの他人の家で暮すのも、難儀だが。

 

 

 

 

桜乃さんはまるでOLに向いてないらしく、就職面接は全滅。

寝袋を購入したキャンプ用品店で、時給850円でバイトをはじめる。

「キャンプとか意味わかんない」のに。

 

 

 

 

無理やり連れられたキャンプ場で釣りをさせられる。

いつの間に消えた。

事務仕事ができないはずだ。

 

 

 

 

ちかくでバーベキューする人をみつけ、食料調達。

たくましい。

 

 

 

 

生き馬の目を抜く競争社会をサバイブするのに必要なのは、

図太さと、可愛げ。

本作は、二十一世紀の必読書かも。






桜乃さん迷走中!(1) (まんがタイムコミックス)桜乃さん迷走中!(1) (まんがタイムコミックス)
(2012/08/07)
えのきづ

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苑田 謙

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